सनद एक प्रकार का प्रमाण पत्र था, जिसमें अंग्रेजी सरकार द्वारा रियासतों की रक्षा करने का वादा किया जाता था तथा उसके बदले में रियासतों को कुछ शर्तों का पालन करना होता था। अंग्रेजों के द्वारा सनद में निम्न शर्तें लगाई जाती थी:------------------
1. रियासतों के शासक अंग्रेजों के व्यापारियों को व्यापार के लिए मार्ग उपलब्ध करवायेंगे।
2. रियासतों के शासक अंग्रेजों का माल ढोने तथा अपने-अपने क्षेत्रों में सड़कें बनाने के लिए बेगार उपलब्ध करवाएंगे।
3. ये रियासतें अंग्रेजी सरकार के प्रमुख अधिकारी के अधीन कार्य करेंगी तथा नकदी के रूप में अंग्रेजी सरकार को नजराना देंगी।
4. यदि किसी भी रियासत का शासक सनद में दी गई शर्तों का पालन नहीं करेगा तो अंग्रेजी सरकार उसके उतराधिकारी को गद्दी से अपदस्थ कर देगी।
5. रियासतों के लिए अंग्रेजी सरकार से मान्यता प्राप्त करना अनिवार्य होगा।
6. इन रियासतों के शासकों को यह भी कहा गया कि वे अपने क्षेत्र में जनता के लिए कल्याणकारी कार्य करेंगे। जनता की सुविधा के लिए सड़कें बनवायेंगे तथा उनकी सुरक्षा का प्रबंध करेंगे। वे कृषि की प्रगति के लिए भी उचित कदम उठाएंगे।
7. ये सभी रियासतें परस्पर मेल-मिलाप से रहेंगी तथा यदि किसी कारणवश उनमें परस्पर झगड़ा हो जायेगा तो वे अंग्रेजी अदालतों को मध्यस्थ बनायेंगी।
उपरोक्त शर्तों के आधार पर ही अंग्रेजों ने पहाड़ी रियासतों को सनदें प्रदान की। शिमला की बीस पहाड़ी रियासतों को निम्न तिथियों को सनदें प्रदान की गई:------------
1. बिलासपुर के राजा महान चंद को 6 मार्च,1815 ईस्वी को सनद प्रदान की गई।
2. बाघल के राजा जगत सिंह को 3 सितम्बर, 1815 ईस्वी को सनद प्रदान की गई।
3. कुठार के राजा भूप सिंह को 3 सितम्बर, 1815 ईस्वी को सनद प्रदान की गई।
4. बघाट के राणा महिंद्र सिंह को 4 सितम्बर, 1815 ईस्वी को सनद प्रदान की गई।
5. भज्जी के राणा रूद्र पाल को 4 सितम्बर, 1815 ईस्वी सनद प्रदान की गई।
6. धामी के राणा रूद्र पाल को 4 सितम्बर, 1815 ईस्वी को सनद प्रदान की गई।
7. महलोग के ठाकुर संसार चंद को 4 सितम्बर, 1815 ईस्वी को सनद प्रदान की गई।
8. बेजा के ठाकुर मान चंद को 4 सितम्बर, 1815 ईस्वी को सनद प्रदान की गई।
9. क्योंथल के राजा संसार चंद को 6 सितम्बर, 1815 ईस्वी को सनद प्रदान की गई।
10.सिरमौर के राजा फतेह प्रकाश को 21 सितम्बर, 1815 ईस्वी को सनद प्रदान की गई।
11. बलसन के ठाकुर जोग राज को 21 सितम्बर, 1815 ईस्वी को सनद प्रदान की गई।
12. नालागढ़ के राजा राम सरन सिंह को 20 अक्तूबर, 1815 ईस्वी को सनद प्रदान की गई।
13. जुब्बल के राणा पूर्ण चंद को 18 नवम्बर, 1815 ईस्वी को सनद प्रदान की गई।
14. सांगरी के राणा बिक्रमजीत सिंह को 16 दिसम्बर, 1815 ईस्वी को सनद प्रदान की गई।
15. मांगल के राणा बहादुर सिंह को 20 दिसम्बर, 1815 ईस्वी को सनद प्रदान की गई।
16. दारकोटी के राणा सुरतेस राम को दिसम्बर 1815 ईस्वी को सनद प्रदान की गई।
17. कुनिहार के ठाकुर मगन देव को भी दिसम्बर 1815 ईस्वी को सनद प्रदान की गई।
18. कुम्हारसेन के राणा केहर सिंह को 7 फरवरी, 1816 ईस्वी को सनद प्रदान की गई।
19. बुशैहर के राजा महेंद्र सिंह को 8 फरवरी, 1816 ईस्वी को सनद प्रदान की गई।
20. थरोच के ठाकुर झोबू को 31 जनवरी, 1819 को सनद प्रदान की गई।
इस प्रकार शिमला की पहाड़ी रियासतों को अंग्रेजों ने सनदें दे कर अपने संरक्षण में ले लिया।अंग्रेजों ने इन रियासतों पर नियंत्रण रखने के लिए Superintendent, Political Agent और रेजिडेंटो की नियुक्ति की। तत्पश्चात 1815 से लेकर 1845 ईस्वी तक पहाड़ी रियासतों के अंग्रेजों के साथ संबंध मुख्यतः शिकायतों, उतराधिकार संबंधी समस्याओं, क्षेत्रीय अवधारणा आदि पर की केन्द्रित रहे। शिमला की इन पहाड़ी रियासतों पर अंग्रेजों का भारत के स्वतंत्र होने तक आधिपत्य स्थापित रहा।

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